पूना पैकट: दलित गुलामी का दस्तावेज़ (24 सितंबर को पूना पैक्ट दिवस पर विशेष): एस. आर. दारापुरी. आई. पी. एस. ( से. नि.)

Very Nice

The Philosophy of Liberation (मुक्ति का दर्शन )

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भारतीय हिन्दू समाज में जाति को आधारशिला माना गया है . इस में श्रेणीबद्ध असमानता के ढांचे में अछूत सबसे निचले स्तर पर हैं जिन्हें 1935 तक सरकारी तौर पर ‘ डिप्रेस्ड क्लासेज’ कहा जाता था. गांधीजी ने उन्हें ‘हरिजन’ के नाम से पुरस्कृत किया था जिसे अधिकतर अछूतों ने स्वीकार नहीं किया था. अब उन्होंने अपने लिए ‘दलित’ नाम स्वयम चुना है जो उनकी पददलित स्थिति का परिचायक है. वर्तमान में वे भारत की कुल आबादी का लगभग छठा भाग (16.20 %) तथा कुल हिन्दू आबादी का पांचवा भाग (20.13 %) हैं. अछूत सदियों से हिन्दू समाज में सभी प्रकार के सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक व शैक्षिक अधिकारों से वंचित रहे हैं और काफी हद तक आज भी हैं.
दलित कई प्रकार की वंचनाओं एवं निर्योग्यताओं को झेलते रहे हैं. उनका हिन्दू समाज एवं राजनीति में बराबरी का दर्जा पाने के संघर्ष का एक लम्बा इतिहास रहा है. जब श्री…

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